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छत्तीसगढ़

पेड़ लगाओगे तभी तो फल खाओगे’ अभियान से दंपती ने जगाई पर्यावरण संरक्षण की अलख

छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला, जहां एक दंपती ने पर्यावरण संरक्षण के लेकर शिक्षा और कृषि इन तीनों ही क्षेत्रों में अपनी इच्छाशक्ति और बदलाव के संकल्प के साथ एक पहल की। शुरुआत में अपनी बंजर पड़ी जमीन पर सैकड़ों फलों के पौधे लगाए। जैविक खेती का सहारा लिया और बंजर पड़े खेतों को फलों का बगीचा बना दिया।

दोनों इतने से ही नहीं रुके। स्कूली बच्चों को शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया। इसके लिए उन्होंने अपने बाग में उगाए फलों को बेचा नहीं बल्कि स्कूलों में ही फलों का वितरण शुरू किया। इससे शुरुआत हुई ‘पेड़ लगाबो तभे तो फल खाबो’ अभियान की। तीन वर्ष में यह अभियान आगे बढ़ चुका है और अब तक एक हजार शिक्षकों व विद्यार्थियों इससे जुड़ चुके हैं। स्वप्रेरणा से विद्यार्थियों ने पांच हजार फलदार पौधे लगाए हैं।

शासकीय सेवा में कार्यरत मगरलोड ब्लाक के ग्राम भैंसमुंडी निवासी तुमनचंद साहू के पास साढ़े तीन एकड़ की बंजर जमीन थी। उनकी गोशाला में शुरुआत में 25 गाय थी। यहां से निकले 50 ट्राली गोबर खाद को अपने बंजर खेत में डाला। इससे खेत उपजाऊ बन गया। इसके साथ ही केंचुआ खाद बनाकर पौधों में डालना शुरू किया। अब तक एक लाख किलो केंचुआ खाद बना चुके हैं।

दो एकड़ जमीन पर उन्होंने 1,100 से अधिक फलदार पौधे लगाए है। इनमें अमरूद, केला, आम, चीकू, नारियल, जामुन, कटहल, मूंगा, चंदन, नीम आदि शामिल है। इन पौधों को सिंचित करने, जल संरक्षण और जीव संरक्षण के लिए आधे एकड़ में तालाब बनवाया। आधे एकड़ में जैविक पर्यावरण को बचाने गोशाला और आधे एकड़ में जैविक खेती कर रहे है। उनके बगीचे में सैकड़ों पक्षी रहते है। तुमनचंद रोजाना स्कूली बच्चों के साथ ग्रामीणों को भी अमरूद बांटते हैं। वे बच्चों को चंदन, पपीता, काली हल्दी व नारियल के सात हजार पौधे वितरित चुके हैं। जिन्हें शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लगाया है।

पर्यावरण प्रेमी तुमनचंद का कहना है कि हम समाज को जितना दान देंगे, उतना समाज का उत्थान होगा। बचपन से मेरा प्रकृति से लगाव था। आज प्रकृति ने सेवा करने का मौका दिया है, इसलिए हम लगातार प्रयास कर रहे है। शासकीय विद्यालय में शिक्षिका रंजीता तुमनचंद साहू बताती हैं कि जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक स्तर की समस्या बनी हुई है। इसलिए ‘पेड़ लगाबो तभे तो फल खाबो’ अभियान से पर्यावरण को बचाने का प्रयास कर रहे है। वह 100 से अधिक निजी व सरकारी स्कूलों के बच्चों, आंगनबाड़ी केंद्रों में फल बांट चुके हैं। साहू दंपती अपने वेतन का आधा हिस्सा खर्च कर पोषण, पर्यावरण संरक्षण और जीव रक्षा के साथ खुशियां बांटने का काम कर रहे है।

स्कूल में गूंजता है ‘फल खाबो’ का नारा

अपने-अपने हाथों में अमरूद के फल लेकर उत्साहित बच्चों ने नारा लगाया- ‘पेड़ लगाबो तभे तो फल खाबो’। यानी पेड़ लगाओगे, तभी तो फल खाओगे। यह दृश्य पांच दिसंबर को शासकीय प्राथमिक शाला और हाईस्कूल शंकरदाह का था। दसवीं के सुरेखा बंजारे, केशरी ध्रुव, संध्या सिन्हा, नोयल कंवर और सातवीं के डिकेश कुमार देवांगन, अरमान साहू ने कहा कि हम पौधे लगाएंगे, पौधों की रक्षा करेंगे और फल खाएंगे और दूसरों को भी खिलाएंगे।

संस्था के प्राचार्य एचएल कुर्रे और प्रधानपाठक ईश्वरी दयाल साहू ने कहा कि सभी बच्चे और कर्मचारी भी पेड़ लगाएंगे। साहू दंपती फल वितरण के साथ ही बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए ही प्रेरित नहीं कर रहे हैं। अच्छी शिक्षा के लिए दोनों ने 100 से अधिक स्कूलों में अपने खर्च पर स्मार्ट टीवी लगवाया है। साथ ही स्कूलों में स्मार्ट गणित वर्णमाला, छत्तीसगढ़ी वर्णमाला का कैलेंडर भी बांटते हैं।

Anil Sahu

मुख्य संपादक

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