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छत्तीसगढ़

कोरबा। पिछले पांच दिनों से हो रही झमाझम बारिश के चलते बांगो बांध पूरी तरह से भर गया है। शनिवार की रात को बढ़ते जल स्तर को देखते हुए बांध के तीन गेट से 9,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि आज सुबह पांच गेट खोलकर 16,945 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस वजह से हसदेव नदी के किनारे बसे निचली बस्तियों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। कोरबा जिले में पिछले चार दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण नदी-नाले उफान पर हैं। बांगो बांध में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बांध के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए शनिवार रात करीब 10 बजे गेट नंबर 5, 6, और 8 से 9,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके बावजूद पानी का स्तर तेजी से बढ़ता गया, जिसके कारण आज सुबह और दो गेट खोलने पड़े। बांध के पांच गेट से पानी छोड़े जाने के बाद निचली बस्तियों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए हैं। प्रशासन ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और बाढ़ के खतरे को देखते हुए संभावित राहत कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। बांगो बांध का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, और मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और समय-समय पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य संचालक ने वायरोलॉजी लैब को अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। ये वायरोलॉजी लैब कोरोना काल में खोले गए थे। प्रदेश में 15 दिनों में स्वाइन फ्लू से 6 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। 40 से ज्यादा पीड़ित मिल चुके हैं। जबकि एक्टिव केस की संख्या 23 है।

स्वास्थ्य संचालक ने सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और CMHO को तत्काल प्रदेश के वायरोलॉजी लैबों में H1N1 वायरस की जांच के लिए तैयार करने कहा है। जिन वायरोलॉजी लैब में टेक्निशियन नहीं हैं, वहां तत्काल टेक्निकल स्टाफ की भर्ती करने के भी निर्देश दिए हैं।

अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में सर्वाधिक मरीजों का इलाज।
अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में सर्वाधिक मरीजों का इलाज।

वायरोलॉजी लैब के लिए यह निर्देश दिए गए

  • टेस्टिंग किट और केमिकल जो जांच के लिए आवश्यक हो, CGMSC से सप्लाई न होने पर NOC लेकर लोकल स्तर पर खरीदें।
  • मशीनरी की कमी से लैब से काम प्रभावित हो तो CGMSC से तत्काल संपर्क करें।
  • सिविल वर्क की जरूरत हो तो पूरा कराएं।
  • वायरोलॉजी स्टॉफ को समय-समय पर ट्रेनिंग दें। नई संक्रमण की स्थिति के लिए तैयार करें।
  • मंकी पॉक्स की जांच के लिए भी किट की व्यवस्था करने कहा गया है। हालांकि इसका एक भी मरीज अभी छत्तीसगढ़ में नहीं है।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज का वायरोलॉजी लैब।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज का वायरोलॉजी लैब।

Anil Sahu

मुख्य संपादक

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