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छत्तीसगढ़

CG में भ्रष्टाचार का पुल ! तीन साल पहले जबर्रा नाले पर किया गया था निर्माण, पहली बारिश ने ही खोल दी पोल, अब तक पुनर्निर्माण का इंतजार कर रहे ग्रामीण

धमतरी. सरकार लगातार भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिये सख्त कार्रवाई कर रही है. लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग खुलेआम मनमानी कर रहे हैं. जिनके काम को देख कर लगता है कि शायद इन्हें किसी का डर ही नहीं है. धमतरी के जबर्रा गांव से ऐसी ही एक मामला सामने आया है. यहां एक पुल है जो पिछले तीन साल से अब तक बन नहीं पाया है. बना भी तो पहली बारिश ने निर्माण की पोल खोल कर रख दी

जबर्रा वैसे तो धमतरी जिले में आता है. लेकिन ये धमतरी के मुकाबले गरियाबंद से ज्यादा नजदीक है. जबर्रा को गरियाबंद से जोड़ने वाली सड़क पर बेंदरा नाला पर 2020-21 में एक पुल बनाया गया था. जिसकी गुणवत्ता इतनी घटिया थी कि ये पहली बरसात में ही बह गया. आज तीन साल से ये अधूरा टूटा हुआ पुल जस का तस पड़ा हुआ है. आज भी ये पुल गारंटी पीरियड में है. लिहाजा ठेकेदार की लीगल लाईबिलिटी है कि वो इसे दोबारा बनाए. जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वो ठेकेदार से गारंटी का पालन करवाएं. जन प्रतिनिधियो की नैतिक जिम्मेदारी है कि जनहित और जन समस्या से जुड़े सरकारी पैसे से बने इस पुल को ठीक करवाएं. लेकिन हालात साफ दिख रहे हैं. कोई भी अपना काम नहीं कर रहा है.

दूसरी तरफ तीन साल में गांव वालों ने लगातार इस भ्रष्टाचार की शिकायत की है. जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक कई चक्कर लगा चुके हैं. इस शिकायत बाजी में गांव वालों के 50 से 60 हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. लेकिन स्थिति वही ढाक के तीन पात. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ठेकेदार को बचाने की कोशिश हो रही है?ग्रामीण माधव सिंह मरकाम ने बताया कि ये नगरी से गरियाबंद जाने का शॉर्टकट रास्ता है. इस पुल को बनाने के लिए गांव वाले चंदा इकट्ठा करके रायपुर, धमतरी, मंत्रालय सब जगह गए. ले दे के पुल निर्माण का काम स्वीकृत हुआ. लेकिन ये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. माधव ने बताया कि पुल बनने के बाद पहली बारिश में ही ये खत्म हो गया. जो पुलिया बनाए भी थे उसको पहले बने पुल के उपर की बना दिया गया. यहां पानी के ज्यादा बहाव को देखते हुए ग्रामीणों ने बड़े पुल की मांग की थी. लेकिन इंजीनियर ने छोटे पुल में काम हो जाएगा कह के बड़ा पुल नहीं बनाया.

पूर्व विधायक ने भी ध्यान नहीं दिया इसलिए टिकट गई- ग्रामीण

सड़क बनाने के लिए भी फंड स्वीकृत हुआ लेकिन काम बंद पड़ गया. पूछने पर बताया जाता है कि पैसा खत्म हो गया है. माधव ने बताया कि पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव से भी इस संबंध में संज्ञान लेने के लिए कहा गया था. लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया. इस वजह से उनकी टिकट कट गई. इसी तरह अंबिका मरकाम को बार-बार इस मुद्दे को उठाने की मांग की जा रही है. लेकिन उनका भी ध्यान इस तरफ नहीं है. माधव ने कहा कि ये कोई बड़ी मांग नहीं है. फॉरेस्ट का क्लियरेंस मिल चुका है.

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Anil Sahu

मुख्य संपादक

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