राम मंदिर निर्माण आंदोलन पर बनी मूवी ‘695’ का दिल्ली में हुआ प्रीमियर, रायपुर के मेकर्स ने बनाई फिल्म

राम मंदिर निर्माण आंदोलन पर बनी मूवी ‘695’ की देशभर में चर्चा है। मूवी को रायपुर के मेकर्स ने तैयार किया है। इसमें राम मंदिर के लिए संघर्ष को दिखाया गया है। खास बात यह है कि उन्हीं लोकेशन पर शूटिंग की गई है, जहां मंदिर आंदेलन से जुड़ी घटनाएं हुई थीं।
फिल्म 19 जनवरी को देशभर के 800 सिनेमा घरों में रिलीज होगी। शदाणी फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को छत्तीसगढ़ के श्याम चावला ने प्रोड्यूस किया है। वहीं छत्तीसगढ़ बीजेपी के मीडिया प्रभारी और फिल्म के सह निर्माता सीए अमित चिमनानी, इंद्र मिश्रा और श्याम शदानी है। फिल्म को डायरेक्ट योगेश भारद्वाज और रजनीश बैरी ने किया है। फिल्म में अरुण गोविल के अलावा कई नामी कलाकारों मनोज जोशी, केके रैना अशोक समर्थ जैसे कई कलाकार इतिहास के 550 साल से ज्यादा दबे तथ्यों को उजगार कर रहे हैं। अरुण गोविल एक ऐसे साधु की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान राम और राम मंदिर बनने की प्रतीक्षा में बिता दिया।
क्या है 695 नाम रखने का कारण –
फिल्म मेकर श्याम चावला ने बताया कि फिल्म का नाम 6 यानी 6 दिसंबर जब विवादित ढांचा गिराया गया। 9 यानी 9 नवंबर जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया और 5 मतलब 5 अगस्त जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया था।
राम मंदिर आंदोलन को लेकर हुई तमाम ऐतिहासिक घटनाओं को मूवी में शामिल किया गया है। जहां कारसेवकों की हत्या हुई, उसी जगह पर उन दृश्यों को फिल्माया गया है। दिल्ली में मूवी का प्रीमियर किया गया है।
फिल्म 695 के प्रीमियर पर विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट विभूतियों ने कहा कि यह फिल्म मात्र मनोरंजन नहीं बल्कि सनातनी धर्म, संस्कृति के स्वाभिमान, संघर्ष और विजय का जयघोष है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष का यह चित्रण रोंगटे खड़े करने वाला है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा यह फिल्म आज की युवा पीढ़ी को हमारे इतिहास की जानकारी देकर प्रेरित करेंगी। आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि ऐसे प्रयासों की हम सराहना करते हैं, यह फिल्म नहीं हमारा इतिहास है और सच्चाई है। संत डॉक्टर युधिष्ठिरलाल महाराज ने कहा मंदिर बन रहा है, सभी में उत्साह है पर बलिदानियों को याद करना जरूरी है।
धर्मगुरु महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम ने कहा कि आम तौर पर साधू सन्यासियों को सिनेमाघरों में जाते नहीं देखा जाता। पर ये फिल्म देखने देश के सभी अखाड़ों के साधू संन्यासी सिनेमाघरों में जाएंगे।





