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    Home»छत्तीसगढ़»शाह बोले-ड्रग पैडलर की संपत्ति जब्त करें, झिझके नहीं:छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में PACS का किया आगाज; कहा- इथेनॉल प्लांट लगाए सरकार
    छत्तीसगढ़

    शाह बोले-ड्रग पैडलर की संपत्ति जब्त करें, झिझके नहीं:छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में PACS का किया आगाज; कहा- इथेनॉल प्लांट लगाए सरकार

    Anil SahuBy Anil SahuAugust 25, 2024No Comments0 Views
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    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अफसरों से कहा कि, ड्रग्स तस्करी की जांच को साइंटिफिक तरीके से करें। टॉप टू बॉटम अप्रोच को अडॉप्ट करना पड़ेगा। एक दुकान में नशे की पुड़िया आई तो पता करना होगा कि देश में कहां से आई, कहां बनी। इसके नेटवर्क को ध्वस्त करना पड़ेगा। साथ ही कहा कि, ड्रग डीलर की संपत्ति जब्त कीजिए।

    अमित शाह 3 दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे के बाद रविवार को रायपुर से दिल्ली रवाना हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने नवा रायपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के आंचलिक ऑफिस का उद्घाटन किया। नारकोटिक्स की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अफसरों को ये निर्देश दिए।

    इसके बाद शाह ने केंद्र और राज्य के अफसरों की भी रायपुर में बैठक ली। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में CBI के उपयोग का प्रतिशत 1.45 है, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। रिव्यू मीटिंग के बाद छत्तीसगढ़ में सहकारिता के विस्तार को लेकर भी चर्चा की गई।

    केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल भी शामिल हुए। इसके अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, प्रदेश सहकारिता मंत्री केदार कश्यप भी बैठक में शामिल रहे। सहकारिता को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार नई स्कीम लॉन्च करेगी।

    अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पानी से जुड़ी समिति के रूप में PACS (Primary Agriculture Credit Society) का शुभारंभ भी किया। सहकारिता समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि, देश की हर पंचायत में एक सहकारी समिति के गठन किया जा रहा है।

    साथ ही उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को जनजातीय विकास के लिए एक नई पब्लिक डेयरी योजना बनानी चाहिए। ये योजना पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी संस्था का काम करेगी। छत्तीसगढ़ की सभी 2058 PACS ने मॉडल बाय-लॉज को अपना लिया है।

    उन्होंने सलाह दी कि, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का उपयोग छत्तीसगढ़ में ड्राइ एरिया ढूंढने के लिए करना चाहिए। इससे सहकारिता के विस्तार में मदद मिलेगी। साथ ही कहा कि, PACS को Common Service Centre (CSC) बना देना चाहिए जिससे कई गतिविधियों का लाभ ग्रामीण जनता तक पहुंच सके।

    शाह ने कहा छत्तीसगढ़ में 4 सहकारी चीनी मिलें हैं जिनमें से सिर्फ एक मिल में इथेनॉल उत्पादन प्लांट है। शाह ने कहा कि बाकी 3 सहकारी चीनी मिलों में 6 महीने के अंदर मल्टी फीड इथेनॉल उत्पादन प्लांट लगाए जाएं, जिससे मक्का और गन्ना आदि से इथेनॉल उत्पादन किया जा सके। उन्होने कहा कि इसमें केन्द्र सरकार मदद करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में मक्के और दलहन की खेती को बढ़ावा देने की ज़रूरत है और इसके लिए राज्य के कृषि विभाग को पहल करनी चाहिए।

    अमित शाह ने कहा कि निकट भविष्य में छत्तीसगढ़ राज्य में PACS के विस्तार को ध्यान में रखते हुए कम से कम 4 और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक( DCCB) की स्थापना होनी चाहिए।प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) सहकारी समितियां होती हैं, जो संबंधित राज्य के सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत होती हैं। ये समितियां ग्रामीण इलाकों में स्थित होती हैं और इनके शेयरधारक-सदस्य किसान, कारीगर, और अन्य कमज़ोर तबके के लोग होते हैं। PACS का मकसद, किसानों और ग्रामीण कृषि समुदायों को कर्ज और वित्तीय सेवाओं के अलावा कई तरह की सेवाएं देना है।

    • ड्रग के डिक्टेशन, नेटवर्क का डिस्ट्रक्शन, कलप्रिट का डिटेंशन, और ऐडिक्ट का रिहैबिलिटेशन पर काम करके सफल होंगे।
    • जो ड्रग कंज्यूम करता है वह सिस्टम का विक्टम है। जो व्यापार करता है, वह गुनहगार है।
    • छत्तीसगढ़ 7 राज्यों से अपनी सीमा शेयर करता है।
    • बंगाल की खाड़ी के नजदीक है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश की कोस्टल कनेक्टिविटी भी ड्रग्स का एक रूट तैयार करती है।
    • गांजा की तस्करी आंध्र और ओडिशा की सीमा से होती है।
    • छत्तीसगढ़ में गांजा के नशे का उपयोगकर्ता 4.98 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 2.83 प्रतिशत से बहुत अधिक है।
    • नारकोटिक्स से अर्जित किया गया धन आतंकवाद, नक्सलवाद और भारत को निर्बल करने के काम भी आता है।
    • ड्रग डीलर्स की प्रॉपर्टी जब्त करने के कानून के अधिकार का प्रयोग करिए, इसमें कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
    • फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन के लिए केंद्रीय एजेंसियों की मदद लीजिए। कुछ अंतर राज्य और अंतरराष्ट्रीय केस NCB को दीजिए।
    सहकारिता विभाग को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य की समीक्षा की गई।

    अमित शाह ने निर्देश दिए हैं कि अधिकारियों को रेगुलर बैठक करने की जरूरत है। इसमें लक्ष्य तय किए जाने चाहिए, फॉर्मेलिटी नहीं होनी चाहिए। जो लक्ष्य तय हुआ, उसके अचीवमेंट का रिव्यू भी अधिकारियों को करना होगा। तभी जाकर हम इस पर काम अच्छी तरह से कर पाएंगे

    उन्होंने कहा कि, जॉइंट कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाकर इस तंत्र का बेहतर उपयोग करना चाहिए। फाइनेंशियल ट्रेड और फंडिंग के सोर्स इसकी जांच करते हुए मजबूत केस बनाकर एक्शन लीजिए।

    दरअसल, नक्सलवाद के बाद दूसरे दिन देश भर में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। बैठक में राज्य और केंद्र सरकार के अलग-अलग विभाग के अधिकारी शामिल हैं। उनसे ड्रग्स नेटवर्क, इसे रोकने, कार्रवाई, युवाओं और स्टूडेंट्स में जागरूकता को लेकर चर्चा की जा रही है।

    बैठक में इंटेलिजेंस ब्यूरो, राजस्व खुफिया निदेशालय, रेलवे सुरक्षा बल, भारतीय डाक, राज्य औषधि नियंत्रक, फोरेंसिक विज्ञान एक्सपर्ट, सामाजिक न्याय मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय, राज्य एड्स नियंत्रण संगठन के केंद्र से और राज्य से अफसर हिस्सा ले रहे हैं।

    उनके अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, गृह विभाग के सचिव, पुलिस , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, समाज कल्याण मंत्रालय, वन विभाग , कृषि विभाग , राज्य उत्पादन शुल्क ,उच्च शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग जैसे डिपार्टमेंट के सचिव भी शामिल हैं।

    रायपुर में NCB कार्यालय केंद्रीय सचिवालय भवन में शुरू किया गया है। कार्यालय के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, डिप्टी CM विजय शर्मा मौजूद थे।

    इस दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ से 6 राज्यों ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश की सीमा लगी हुई है। यह मादक पदार्थों की तस्करी के लिए देश भर में कॉरिडोर का काम करती है। यह एजेंसी अलग-अलग राज्यों और केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी।

    इससे पहले शनिवार को अमित शाह ने कहा था कि, मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। अब समय आ गया है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पर एक मजबूत रणनीति के साथ अंतिम प्रहार किया जाए। इससे पहले रायपुर में 7 राज्यों के अफसरों के साथ बैठक की।

    शाह ने बताया था कि, आज की मीटिंग में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुछ फैसले लिए हैं। जो लोग वामपंथी उग्रवाद के लंबे समय के प्रभाव के कारण निरक्षर रह गए हैं, उनको साक्षर बनाया जाएगा। चाहे उनकी आयु कोई भी हो। इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार का गृह मंत्रालय एक अभियान चलाएगा।

    साथ ही शाह ने कहा कि, तेंदूपत्ता की खरीदी की पॉलिसी में भी हम परिवर्तन करेंगे और इसके साथ-साथ NIA के तर्ज पर SIA बनाकर इसे ताकतवर बनाएंगे। जो दोष सिद्ध का प्रमाण है उसे भी बढ़ाएंगे। गृहमंत्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार सरेंडर पॉलिसी को भी अपडेट कर रही है, एक-दो महीने में इसकी घोषणा होगी।

    शाह ने कहा कि, नक्सल प्रभावित जिलों में केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजना का सौ फीसदी काम हो इसे लेकर बैठक में चर्चा हुई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के जो प्रोजेक्ट है उसकी प्रगति और प्रगति के रास्ते में जो अड़चन है इसको दूर करने के लिए हमने मीटिंग की है। भारत सरकार बस्तर से बीजापुर और दंतेवाड़ा से लेकर धमतरी तक कुरूद के विकास के लिए कटिबद्ध है।शाह ने कहा कि, मेरी सभी वामपंथी उग्रवाद में लिप्त युवाओं से अपील है कि भारत सरकार आपके और आपके क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। हथियार छोड़िए और एक नए युग का आगाज हुआ है इसको आप सभी मजबूती दीजिए। मैं आशा करता हूं कि हमने जो लक्ष्य तय किया है उस लक्ष्य के अनुसार ही पूरे छत्तीसगढ़ और पूरे देश को हम नक्सलवाद की समस्या से मुक्त कराएंगे।

    अमित शाह ने नक्सलवाद मोर्चे पर छत्तीसगढ़ सरकार के किए काम की सराहना की। कहा, छत्तीसगढ़ में नई सरकार आने के बाद में इन्होंने बड़ी शिद्दत से अच्छा काम किया है। देश की बात की जाए तो 90% हिस्सा छत्तीसगढ़ का है जो नक्सल प्रभावित है। यहां 179 वामपंथी उग्रवादियों को न्यूट्रलाइज करने का काम अगस्त महीने तक हुआ है।

    559 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 540 ने आत्मसमर्पण किया है 46 नए फोर्स के कैंप स्थापित किए गए हैं। शाह ने आगे कहा, हिड़मा के गांव में जाकर प्रदेश के गृहमंत्री उनका आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड देते हैं तो दिल्ली में बैठकर बहुत संतोष होता है।

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने किया अमित शाह का स्वागत।
    • छत्तीसगढ़ : बीजापुर, दंतेवाडा, धमतरी, गरियाबंद, कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहल्ला मानपुर, आबगढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, कबीरधाम और मुंगेली जिले हैं।
    • ओडिशा : कालाहांडी, कंधमाल, बोलांगीर, मलकानगिरी, नबरंगपुर, नुआपाड़ा और रायगढ़ नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल है।
    • झारखंड : पांच जिले गिरिडीह, गुमला, लातेहार, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूमि इसमें शामिल हैं।
    • आंध्रप्रदेश : अल्लूरी सीतारमा राजू, पूर्वी गोदावरी, पार्वतीपुरम मान्यम, श्रीकाकुलम और विशाखापत्तनम जिले शामिल हैं ।
    • मध्यप्रदेश : बालाघाट,मंडला जिले और डिंडोरी जिले में नक्सलियों का प्रभाव दिखता है।
    • केरल : वायनाड़ और कुन्नूर, महाराष्ट्र में गढ़चिरौली और गोंदिया, तेलंगाना में भाद्राद्री-कोथागुड़ेम और मुगुलू जिलों में नक्सलियों का दबदबा है।

    भारत में नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई थी। शुरू में पुलिस ने इस विद्रोह को कुचलने की कोशिश की, लेकिन दशकों बाद यह आंदोलन झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में फैल गया।

    नक्सलवाद की शुरुआत चारु माजूमदार और कानू सान्याल ने की थी। साल 1969 में इन दोनों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर पूरे देश में सत्ता के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया था। आंदोलनकारी नेताओं का मानना था कि ज़मीन उसी को होनी चाहिए जो उस पर खेती करें।

    बाद में इस आंदोलन में छात्र भी शामिल हो गए। नक्सलवाद के ज़रिए कुछ कम्युनिस्ट गुरिल्ला युद्ध के ज़रिए राज्य को अस्थिर करना चाहते हैं. वे मौजूदा शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंककर लगातार युद्ध के ज़रिए ‘जनताना सरकार’ लाना चाहते हैं।

    बैठक से पहले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंपारण में चंपेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की। वे वल्लभाचार्य मंदिर में भी गए। उनके साथ सीएम साय और डिप्टी सीएम शर्मा भी मौजूद रहे।

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